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NCERT Class 6 Hindi Chapter 4

हार की जीत (Haar Ki Jeet)

यह प्रसिद्ध कहानी सुदर्शन द्वारा लिखी गई है जिसमें एक माँ की ममता और भक्ति की शक्ति का वर्णन है। कहानी में एक डाकू का हृदय-परिवर्तन होता है जब वह एक वृद्ध माँ की निःस्वार्थ भक्ति देखता है। यह पाठ सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम में अपार शक्ति होती है जो दुष्ट हृदय को भी बदल सकती है।

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Key Terms

हृदय-परिवर्तन
किसी व्यक्ति के विचारों और आचरण में आमूल बदलाव, जिसमें वह बुराई छोड़कर अच्छाई का मार्ग अपनाता है।
भक्ति
ईश्वर या किसी प्रिय के प्रति निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण की भावना।
ममता
माँ का अपने बच्चों के प्रति अत्यंत गहरा और निःस्वार्थ प्रेम।
डाकू
वह व्यक्ति जो लूट-पाट और अपराध करता हो; कहानी में डाकू का पात्र नकारात्मकता का प्रतीक है।
अहिंसा
किसी भी प्राणी को मन, वचन या कर्म से चोट न पहुँचाने का सिद्धांत।

Frequently Asked Questions

हार की जीत कहानी में किसकी हार और किसकी जीत हुई?

हार की जीत कहानी में डाकू की बुराई की हार हुई और एक माँ की भक्ति व प्रेम की जीत हुई। बाह्य रूप से माँ निर्बल और डाकू शक्तिशाली लगता था, लेकिन अंत में माँ की निःस्वार्थ भक्ति और प्रेम ने डाकू के हृदय को परिवर्तित कर दिया।

कहानी में डाकू का हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ?

डाकू ने देखा कि एक वृद्ध माँ अपने बेटे की सलामती के लिए रात के अंधेरे में अकेले मंदिर जाती थी। उसकी निःस्वार्थ भक्ति और बेटे के प्रति अटूट प्रेम देखकर डाकू का कठोर हृदय पिघल गया और उसने अपना दुष्कर्म छोड़ने का निश्चय किया।

इस कहानी का शीर्षक 'हार की जीत' क्यों रखा गया है?

शीर्षक 'हार की जीत' इसलिए सार्थक है क्योंकि जो बाहर से हारी हुई लगती थी (कमजोर बुजुर्ग माँ), वह अंत में जीती। और जो जीता हुआ प्रतीत होता था (शक्तिशाली डाकू), वह अपनी बुराई से हार गया। यह विरोधाभास शीर्षक को अत्यंत अर्थपूर्ण बनाता है।

कहानी से हमें क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?

कहानी से शिक्षा मिलती है कि सच्चे प्रेम और भक्ति में अपार शक्ति होती है, बुराई को हमेशा अच्छाई से जीता जा सकता है, कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से बुरा नहीं होता और उसमें सुधार की संभावना रहती है, तथा शारीरिक शक्ति से बड़ी आत्मिक शक्ति होती है।

कहानी में माँ के चरित्र की क्या विशेषताएँ हैं?

माँ निःस्वार्थ, भक्तिमान, साहसी, और अपने पुत्र से अगाध प्रेम करने वाली है। वह रात के अंधेरे में अकेले मंदिर जाने से नहीं डरती। उसकी भक्ति में कोई दिखावा नहीं है। अपने बेटे की खुशी के लिए वह सब कुछ सहने को तैयार है। वह शक्ति और ममता की प्रतीक है।

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