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मैया मैं नहिं माखन खायो (Maiya Main Nahin Makhan Khayo)

NCERT Class 6 Hindi • Chapter 9

What is "मैया मैं नहिं माखन खायो (Maiya Main Nahin Makhan Khayo)" about? (Class 6 Hindi)

यह सूरदास द्वारा रचित प्रसिद्ध पद है जिसमें बाल-कृष्ण माखन चुराने के बाद यशोदा माँ से मासूमियत से इनकार करते हैं। यह पद बाल-मनोविज्ञान, वात्सल्य रस, और कृष्ण-भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। सूरदास की कविता में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का जो चित्रण है वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है।

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मैया मैं नहिं माखन खायो (Maiya Main Nahin Makhan Khayo): Key Terms & Definitions

वात्सल्य रस
माता-पिता के अपनी संतान के प्रति प्रेम से उत्पन्न काव्य-रस; यशोदा और कृष्ण के बीच के संबंध में यह रस चरमोत्कर्ष पर है।
बाल-लीला
श्रीकृष्ण के बचपन की मनमोहक क्रीड़ाएँ और चेष्टाएँ जिनका वर्णन सूरदास के पदों में विस्तार से मिलता है।
सूरदास
16वीं शताब्दी के महान भक्त कवि जो दृष्टिहीन थे और जिन्होंने कृष्ण-भक्ति में अनगिनत पद रचे, अष्टछाप के प्रमुख कवि।
ब्रजभाषा
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र की बोली जिसमें सूरदास, मीराबाई आदि भक्त कवियों ने अपनी रचनाएँ कीं।
पद
संगीत पर आधारित काव्य-रचना जो मुख्यतः भक्ति साहित्य में पाई जाती है और जिसे गाया जा सकता है।

Frequently Asked Questions

इस पद में कृष्ण कौन-कौन से बहाने बनाते हैं?

कृष्ण अपनी माँ यशोदा को बताते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। वे कहते हैं कि उनके हाथ छोटे हैं, मटकी ऊँची है, तो वे माखन कैसे खा सकते हैं। वे ग्वाल-बालों पर दोष लगाते हैं और कहते हैं कि उन्होंने झूठ बोलकर माता को भड़काया है।

सूरदास कौन थे और उन्होंने किस विषय पर काव्य रचना की?

सूरदास 16वीं शताब्दी के महान अंधे कवि थे जो कृष्ण-भक्ति में लीन थे। उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, भक्ति, और गोपी-प्रेम पर हजारों पद रचे जो 'सूरसागर' में संकलित हैं। वे वल्लभाचार्य के शिष्य और अष्टछाप के कवियों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।

वात्सल्य रस क्या है और इस पद में कैसे प्रकट होता है?

वात्सल्य रस माता-पिता के संतान के प्रति प्रेम से उत्पन्न काव्य-रस है। इस पद में यशोदा का कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम और कृष्ण की बाल-सुलभ मासूमियत मिलकर वात्सल्य रस का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

ब्रजभाषा की क्या विशेषताएँ हैं?

ब्रजभाषा मथुरा-आगरा क्षेत्र की मधुर बोली है जिसमें 'ओ' और 'ओ' ध्वनियाँ अधिक हैं। यह काव्य के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी गई है क्योंकि इसमें संगीतात्मकता, कोमलता और भावप्रवणता है। सूरदास, मीराबाई, बिहारी जैसे कवियों ने ब्रजभाषा में अमर काव्य-रचनाएँ कीं।

इस पद में हास्य रस कैसे प्रकट होता है?

कृष्ण की चतुराई और मासूम बहाने पाठकों को आनंदित करते हैं। माखन खाकर भी पूरी बेशर्मी से इनकार करना, ग्वाल-बालों पर दोष लगाना, और बड़े-बड़े तर्क देना – ये सब हास्य उत्पन्न करते हैं। बाल-कृष्ण की चंचलता और चतुराई का यह चित्रण हास्य और वात्सल्य का अनोखा संगम है।

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