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NCERT Class 6 Hindi Chapter 8

सत्रिया और बिहू नृत्य (Satriya aur Bihu Nritya)

यह पाठ असम की दो प्रमुख नृत्य परंपराओं – सात्रिया और बिहू – का परिचय देता है और भारत की सांस्कृतिक विविधता को उजागर करता है। छात्र इन नृत्यों के इतिहास, विशेषताओं, पोशाक, संगीत वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक महत्त्व के बारे में जानते हैं। पाठ यह समझाता है कि भारत के विभिन्न नृत्य रूप हमारी साझी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।

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Key Terms

सात्रिया नृत्य
असम का एक शास्त्रीय नृत्य रूप जिसे 15वीं शताब्दी में संत शंकरदेव ने भक्ति आंदोलन के अंतर्गत विकसित किया और यह भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में शामिल है।
बिहू नृत्य
असम का लोकप्रिय लोक नृत्य जो बिहू उत्सव के अवसर पर किया जाता है, इसमें फसल और ऋतु-परिवर्तन का उत्सव मनाया जाता है।
शास्त्रीय नृत्य
भारत के वे पारंपरिक नृत्य जो शास्त्र-सम्मत नियमों पर आधारित हैं और जिन्हें सांगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त है।
लोक नृत्य
किसी क्षेत्र की जनसामान्य द्वारा उत्सव, त्योहार या विशेष अवसरों पर किया जाने वाला पारंपरिक नृत्य।
सांस्कृतिक विरासत
पूर्वजों से विरासत में मिली परंपराएँ, कलाएँ, और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ जिन्हें संजोकर रखना आवश्यक है।

Frequently Asked Questions

सात्रिया नृत्य की शुरुआत कैसे हुई?

सात्रिया नृत्य की शुरुआत 15वीं शताब्दी में महान वैष्णव संत और कवि शंकरदेव ने की। उन्होंने भक्ति आंदोलन के प्रचार-प्रसार के लिए इस नृत्य शैली को विकसित किया। यह नृत्य असम के सत्रों (वैष्णव मठों) में किया जाता था और भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित है।

बिहू नृत्य और बिहू त्योहार में क्या संबंध है?

बिहू असम का सबसे महत्त्वपूर्ण त्योहार है जो तीन बार मनाया जाता है – बोहाग बिहू (अप्रैल), काटी बिहू (अक्टूबर), और माघ बिहू (जनवरी)। बिहू नृत्य इसी त्योहार में युवा लड़के-लड़कियाँ मिलकर ढोल, पेपा और ताल जैसे वाद्ययंत्रों की धुन पर करते हैं। यह नृत्य ऋतु-परिवर्तन और कृषि उत्सव का प्रतीक है।

सात्रिया और बिहू नृत्य में क्या अंतर है?

सात्रिया एक शास्त्रीय नृत्य है जो नियमबद्ध तकनीक पर आधारित है और मंदिरों/सत्रों में किया जाता था, जबकि बिहू एक लोक नृत्य है जो खुले मैदानों में समूह में किया जाता है। सात्रिया में भक्ति भाव है, बिहू में उत्सव और आनंद का भाव प्रमुख है।

भारत के अन्य शास्त्रीय नृत्य कौन से हैं?

भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य हैं: भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथकली (केरल), कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश), ओडिसी (ओडिशा), कत्थक (उत्तर भारत), मणिपुरी (मणिपुर), मोहिनीअट्टम (केरल), और सात्रिया (असम)। ये सभी सांगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

नृत्य कलाओं को संरक्षित करना क्यों जरूरी है?

नृत्य कलाओं को संरक्षित करना जरूरी है क्योंकि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का हिस्सा हैं, इनमें इतिहास, धर्म, और जीवन-दर्शन समाहित हैं, ये क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृतियों को जीवित रखती हैं, और इनसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांस्कृतिक संबंध बना रहता है।

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