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NCERT Class 7 Hindi Chapter 10

मीरा के पद (Meera Ke Pad)

यह पाठ भक्तिकालीन महान कवयित्री मीराबाई के पदों पर आधारित है, जो कृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। मीरा के पद सरल भाषा में गहन आध्यात्मिक और प्रेम भावना को व्यक्त करते हैं। छात्र इस पाठ से भक्तिकालीन हिंदी साहित्य, मीरा के जीवन और भक्ति आंदोलन के महत्व को समझेंगे।

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Key Terms

मीराबाई
16वीं शताब्दी की राजस्थानी संत-कवयित्री जो कृष्ण भक्ति के पदों के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं।
पद
भक्तिकालीन काव्य की एक विधा जो गेय होती है और भगवान के प्रति भक्ति और प्रेम को संगीतात्मक ढंग से व्यक्त करती है।
भक्ति आंदोलन
मध्यकाल में भारत में चला एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन जो भगवान के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और भक्ति पर बल देता था।
कृष्ण भक्ति
भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण, जो मीरा के सभी पदों का केंद्रीय भाव है।
विरह
प्रिय से अलग होने पर होने वाली पीड़ा, जिसे मीरा ने कृष्ण से अपने वियोग के रूप में अपने पदों में व्यक्त किया है।

Frequently Asked Questions

मीराबाई कौन थीं?

मीराबाई 16वीं शताब्दी की राजस्थानी संत-कवयित्री थीं। वे राजपूत राजकुमारी थीं जिन्होंने कृष्ण को अपना पति मानकर उनकी भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया।

मीरा के पदों की क्या विशेषता है?

मीरा के पद सरल और भावपूर्ण भाषा में लिखे गए हैं। वे गेय हैं, राजस्थानी और ब्रजभाषा में हैं, और कृष्ण के प्रति गहरे प्रेम और भक्ति को सहज भाव से व्यक्त करते हैं।

भक्ति आंदोलन का क्या महत्व था?

भक्ति आंदोलन ने समाज में व्याप्त जाति-भेद, छुआछूत और धार्मिक आडंबर का विरोध किया। इसने भगवान के प्रति व्यक्तिगत प्रेम पर बल दिया और समाज में समानता और एकता का संदेश दिया।

मीरा ने किसकी भक्ति की और क्यों?

मीरा ने भगवान कृष्ण की भक्ति की। उन्होंने बचपन से ही कृष्ण को अपना पति मान लिया था। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने राजसी सुख-सुविधाएं त्याग दीं और कृष्ण के प्रेम में जीवन व्यतीत किया।

हिंदी साहित्य में मीरा का क्या स्थान है?

मीरा हिंदी की भक्तिकालीन कविता की सर्वश्रेष्ठ कवयित्रियों में से एक हैं। उनके पद भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं और आज भी लोकप्रिय गीतों के रूप में गाए जाते हैं।

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